हमारे
शहीद वीरों
की स्मृति में

विश्व युद्धों, कारगिल युद्ध और अन्य सैन्य अभियानों के दौरान सर्वोच्च

बलिदान देने वाले वीर सपूतों को श्रद्धांजलि। उनका साहस और समर्पण कभी भुलाया नहीं जाएगा।

"प्रमुख संघर्षों में दिए गए बलिदानों को श्रद्धांजलि"

प्रथम विश्व युद्ध 

(१९१४ – १९१८)

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका सहित विभिन्न युद्ध क्षेत्रों में लड़ते हुए ७४,००० से अधिक भारतीय सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी। उनकी वीरता और योगदान मित्र राष्ट्रों की विजय में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

स्वतंत्रता संग्राम

(१८५७ – १९४७)

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम एक ऐसा महासंग्राम था जिसमें लाखों देशभक्तों ने अत्याचारों और उत्पीड़न के विरुद्ध अपने साहस का परिचय दिया। उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने का संकल्प लिया। अत्याचार सहते हुए भी वे सत्य, अहिंसा और स्वाभिमान की राह पर अडिग रहे। उनका त्याग, बलिदान और अटूट समर्पण भारत की स्वतंत्रता का आधार बना। यह संघर्ष केवल आज़ादी की लड़ाई नहीं था, बल्कि यह आत्मसम्मान, संस्कृति और अधिकारों की पुनः प्राप्ति की प्रेरणादायक गाथा थी, जो सदैव स्मरणीय रहेगी।

द्वितीय विश्व युद्ध
(१९३९ – १९४५)

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सेना इतिहास की सबसे बड़ी स्वयंसेवक सेनाओं में से एक थी, जिसमें २५ लाख से अधिक सैनिकों ने सेवा दी। उन्होंने यूरोप, उत्तर अफ्रीका और पूरे एशिया में युद्ध किया, जिनमें से अनेक सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी।

भारत-चीन युद्ध
(🗓️ २० अक्टूबर १९६२ से २१ नवम्बर १९६२)

भारत-चीन युद्ध १९६२ में भारतीय सेना ने विषम परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक स्थितियों के बावजूद अद्वितीय साहस और पराक्रम का प्रदर्शन किया। हमारे जवानों ने वीरता से लड़ते हुए देश की रक्षा हेतु अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। यह युद्ध भले ही सामरिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण रहा, परंतु भारतीय सेना का शौर्य और बलिदान इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो गया।

भारत-पाक युद्ध
(🗓️ ३ दिसम्बर १९७१ से १६ दिसम्बर १९७१)

१९७१ के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना ने असाधारण शौर्य, रणनीतिक कौशल और अडिग संकल्प का प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। केवल १४ दिनों में दुश्मन को परास्त कर बांग्लादेश को स्वतंत्रता दिलाना विश्व सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी जीतों में से एक मानी जाती है। हमारे वीर जवानों का साहस, नेतृत्व और बलिदान इस विजयगाथा का अमर प्रतीक बन गया।

कारगिल युद्ध 

(मई – जुलाई १९९९)

कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच एक सशस्त्र संघर्ष था, जो कश्मीर के कारगिल जिले में हुआ। भारतीय सैनिकों ने साहसपूर्वक लड़ते हुए उन ऊँचे ठिकानों को पुनः कब्ज़ा किया, जहाँ पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकवादियों ने घुसपैठ की थी।

अन्य सैन्य अभियान

प्रमुख युद्धों के अतिरिक्त, भारतीय सशस्त्र बलों ने अनेक शांति मिशनों, आतंकवाद-विरोधी अभियानों तथा सीमावर्ती संघर्षों में भाग लिया है। हमारे अनेक वीर सैनिकों ने राष्ट्र की संप्रभुता की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी है।

“एक सच्चा सैनिक इसलिए नहीं लड़ता क्योंकि वह अपने सामने वाले से घृणा करता है, बल्कि इसलिए लड़ता है क्योंकि वह अपने पीछे वालों से प्रेम करता है।”

                                                                                                                                                                                                         — जी. के. चेस्टर्टन

"उनके बलिदान की पुण्य स्मृति"

कारगिल युद्ध ५२७ +
अधिक शहीद जवान

"प्रथम विश्व युद्ध में ७४,००० + भारतीयों ने प्राण गंवाए"

"द्वितीय विश्व युद्ध में ८७,००० + भारतीयों ने प्राण गंवाए"

"२१
परम वीर चक्र प्राप्तकर्ता"