शहीद नायक गोविंद प्रकाश चंद्र

लांस नायक गोविंद प्रकाश चंद्र भारतीय सेना के एक वीर सपूत थे, जिनका जन्म उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले के मूनाकोट गाँव में २२ जून १९८१ को हुआ था। उनके पिता का नाम श्री शेर बहादुर चंद्र और माता का नाम श्रीमती बसंती देवी था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद, उन्होंने रानीखेत के राजकीय इंटर कॉलेज मूनाकोट से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की।

१ जनवरी २००२ को उन्होंने भारतीय सेना की २१ कुमाऊं रेजिमेंट में लांस नायक के पद पर भर्ती होकर देश की सेवा शुरू की। उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के फेरन सेक्टर (Keran Sector) में हुई, जो अत्यंत दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र था।

११ जुलाई २०१५ को ऑपरेशन रक्षक (OP RAKSHAK) के दौरान, जब वे अपने कर्तव्य का पालन कर रहे थे, अचानक हुए भूस्खलन (प्राकृतिक आपदा) के कारण उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं। उन्हें तत्काल उपचार के लिए लखनऊ के कमांड अस्पताल में भर्ती किया गया, जहाँ ०९ सितम्बर २०१७ को उन्होंने अपने प्राण मातृभूमि के लिए न्योछावर कर दिए।

उनकी शहादत ने यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय सैनिक अपने कर्तव्य के प्रति कितने समर्पित होते हैं। उनकी वीरता और बलिदान ने न केवल उनके परिवार को गर्वित किया, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र को प्रेरित किया।

उनकी शहादत के बाद, पिथौरागढ़ जिले में उनके सम्मान में कई स्मारक और कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, ताकि उनकी वीरता और बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाया जा सके। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

लांस नायक गोविंद प्रकाश चंद्र की शहादत को नमन करते हुए, हम उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करते हैं और उनके बलिदान को हमेशा याद रखेंगे। उनका योगदान भारतीय सेना और राष्ट्र के लिए अनमोल रहेगा।

स्मृति

स्व. लांस नायक गोविंद प्रकाश चंद्र को विनम्र श्रद्धांजलि, जिनकी वीरता, निष्ठा और मातृभूमि के प्रति समर्पण अद्वितीय था। पिथौरागढ़ की पुण्य भूमि से निकलकर उन्होंने भारतीय सेना में अपने कर्तव्य का निर्वाह करते हुए देश की सेवा में अपने प्राण अर्पित कर दिए। दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में तैनाती के दौरान प्राकृतिक आपदा में घायल होने के बाद भी उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया और अंततः मातृभूमि की रक्षा करते हुए अमर हो गए। उनका बलिदान राष्ट्र के लिए एक अमिट प्रेरणा है, जिसे हम सदा स्मरण करेंगे। जय हिंद।