पूर्व सैनिक संगठन – पिथौरागढ़ इकाई
पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ की कार्यकारिणी समिति
पूर्व सैनिक संगठन न केवल राष्ट्र की सेवा कर चुके वीर सैनिकों के सम्मान, कल्याण और अधिकारों की रक्षा हेतु कार्य करता है, बल्कि समाज में अनुशासन, समर्पण और सेवा भावना के उच्च मानकों को भी बनाए रखता है। इस संगठन की सुचारु रूप से कार्यप्रणाली, उसकी योजनाओं का क्रियान्वयन और पूर्व सैनिकों की समस्याओं का समाधान जिस महत्वपूर्ण इकाई के माध्यम से संभव होता है, वह है कार्यकारिणी समिति। कार्यकारिणी किसी भी संगठन की रीढ़ होती है — एक ऐसी आधारशिला जिस पर संगठन का सम्पूर्ण ढांचा टिका होता है।
पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ की कार्यकारिणी समिति का गठन पूर्व सैनिकों की सक्रिय सहभागिता, समर्पण और नेतृत्व क्षमता को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। यह समिति न केवल संगठन की विभिन्न गतिविधियों का संचालन करती है, बल्कि जिले के पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के हितों की रक्षा हेतु विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी मंचों पर आवाज़ भी बुलंद करती है। समिति की जिम्मेदारी केवल प्रशासनिक नहीं होती, बल्कि यह सामाजिक, भावनात्मक और वैचारिक स्तर पर भी संगठन को दिशा देने का कार्य करती है।
कार्यकारिणी समिति विभिन्न उपसमितियों, जैसे—कल्याण, रोजगार, पुनर्वास, स्वास्थ्य सहायता, परामर्श आदि के समन्वय के माध्यम से पूर्व सैनिकों को सशक्त बनाने की दिशा में प्रयासरत रहती है। यह समिति जिले में मौजूद सभी पूर्व सैनिकों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखते हुए उनकी ज़रूरतों और समस्याओं को समझती है और उन्हें उचित मंचों तक पहुँचाने का कार्य करती है।
इसके अतिरिक्त, समिति का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य सैनिकों और समाज के बीच पुल का कार्य करना भी है, जिससे समाज को सेना के अनुशासन, बलिदान और सेवा भावना से प्रेरणा मिल सके। समिति समय-समय पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम, सैनिक समागम, स्वास्थ्य शिविर, रोजगार मेले आदि का आयोजन कर समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
संगठन के भीतर पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और सहभागिता को बढ़ावा देने में कार्यकारिणी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके सदस्य अनुभव, सेवा भावना और नेतृत्व कौशल से परिपूर्ण होते हैं, जो संगठन को संगठित, सक्रिय और लक्ष्य-उन्मुख बनाए रखते हैं।
अतः यह कहना उचित होगा कि कार्यकारिणी समिति केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि संगठन की आत्मा है, जो न केवल दिशा देती है, बल्कि संगठन की ऊर्जा, प्रतिबद्धता और सफलता की प्रतीक भी है।
पूर्व सैनिक संगठन के बारे मे
🏰देवभूमि उत्तराखण्ड और पिथौरागढ़ का सैन्य गौरव
उत्तराखण्ड, जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है, सदा से ही वीरों की भूमि रही है। यह भूमि आज़ादी से पहले और बाद में सैकड़ों वीर सपूतों को जन्म दे चुकी है। इन वीरों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। उत्तराखण्ड का सीमांत जनपद पिथौरागढ़, जिसकी सीमाएं चीन और नेपाल से मिलती हैं, वीरता और पराक्रम की भूमि है। यहां के जवानों ने न केवल सीमा की रक्षा की, बल्कि विषम परिस्थितियों में भी शत्रु को झुकने पर मजबूर कर दिया।
जनपद की जनसंख्या और सैनिक पृष्ठभूमि
पिथौरागढ़ जनपद की अनुमानित जनसंख्या लगभग 5 लाख से अधिक है। यह जनपद वर्तमान और पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं एवं उनके आश्रितों की सर्वाधिक संख्या के लिए प्रसिद्ध है। आज़ाद हिंद फौज से लेकर अब तक, यहां के वीर जवानों ने देश सेवा में अहम भूमिका निभाई है। जनपद का भूगोल लगभग सात हजार वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, और दूरस्थ गांवों तक आवागमन की सीमित सुविधा के कारण समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो पाता था।
संगठन की स्थापना की आवश्यकता एवं आरंभ
वर्ष 2021 तक जनपद में कोई सशक्त संगठन नहीं था जो दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और उनके आश्रितों की समस्याओं का समाधान कर सके। इसी आवश्यकता को देखते हुए 26 जून 2021 को “पूर्व सैनिक संगठन, पिथौरागढ़” की स्थापना कुछ पूर्व सैनिकों के सामूहिक विचार एवं प्रयासों से की गई। इसका उद्देश्य इन वीर परिवारों की समस्याओं को सुनना, समझना, और संबंधित विभागों के माध्यम से समाधान सुनिश्चित करना था।
संगठन की संरचना एवं कार्य पद्धति
वर्तमान में संगठन का विस्तार जनपद के प्रत्येक ब्लॉक तक हो चुका है, जहां ब्लॉक संगठन बनाए गए हैं। इन ब्लॉकों के कार्यकर्ता स्थानीय स्तर पर सैनिकों, पूर्व सैनिकों और वीरांगनाओं की समस्याओं को एकत्र कर जनपद संगठन को सूचित करते हैं। जनपद स्तर पर संगठन शासन-प्रशासन से संपर्क कर पत्र व्यवहार व संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान करता है।
👥 संगठन की प्रमुख उपलब्धियां (संक्षिप्त रूप में)
(१) जनपद के प्रत्येक शहीद की पुण्यतिथि पर उनके स्मृति स्थल या घर जाकर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी जाती है। स्मृति स्थलों की नियमित सफाई भी कराई जाती है।
(२) जरूरतमंदों की व्यक्तिगत समस्याओं पर ध्यान देकर उच्च अधिकारियों से संवाद कर समाधान का प्रयास किया जाता है।
(३) पूर्व सैनिकों की पेंशन एवं व्यक्तिगत समस्याओं को लेकर जनपद के गांव-गांव में जाकर समस्याएं सुनी जाती हैं।
(४) उल्का देवी मंदिर के पास शहीद स्मारक निर्माण में संगठन ने राइफल, हेलमेट और शहीद पटल की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(५) 80 वर्ष से अधिक आयु के वृद्ध पूर्व सैनिकों से समय-समय पर भेंट कर उनकी कुशलता जानी जाती है और उनकी समस्याओं का समाधान किया जाता है।
(६) स्थानीय सेना मुख्यालय के साथ सभी अपेक्षित कार्यों में सहयोग करना संगठन की प्राथमिकता है।
🗓️ शहीद प्रवेश द्वारों का निर्माण
संगठन के अथक प्रयासों, आर्थिक सहयोग एवं जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से अब तक चार शहीद द्वारों का निर्माण कराया जा चुका है। इसमें वड्डा स्थित शहीद भुवन चंद्र भट्ट शहीद द्वार प्रमुख उदाहरण है, जिसे पूर्णतः पूर्व सैनिकों ने स्वयं के प्रयासों से बनाकर सरकार को एक संदेश दिया।
युवाओं के लिए सेतु की भूमिका
खेल प्रतिभा वाले युवाओं को सेना में भर्ती के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना संगठन का प्रमुख कार्य रहा है। इस प्रयास से कई युवा आज सेना में कार्यरत हैं। अग्निवीर सेना भर्ती में उत्तराखण्ड बोर्ड के हजारों बच्चों को छठे विषय के कारण बाहर किए जाने की समस्या को लेकर संगठन शासन से निरंतर संवाद में है।
पर्यावरण और सामाजिक योगदान
हरेला पर्व पर वृक्षारोपण अभियान का आयोजन स्कूलों एवं अन्य संस्थाओं में किया जाता है। साथ ही, 2024 की प्रादेशिक सेना भर्ती रैली में बाहर से आए लगभग 12,000 युवाओं के लिए निःशुल्क भोजन एवं रहने की व्यवस्था संगठन द्वारा की गई। अधिकांश पूर्व सैनिकों ने अपने घर युवाओं को रहने व जलपान हेतु खोले।
🎯 स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम
संगठन द्वारा उत्तराखण्ड खादी ग्रामोद्योग आयोग देहरादून के सहयोग से बिण, मुनस्यारी, डीडीहाट और देवलथल ब्लॉकों में मौन पालन, अगरबत्ती निर्माण, तथा गोबर व मिट्टी से दीया निर्माण जैसे प्रशिक्षण कोर्स आयोजित किए गए। 185 पूर्व सैनिक व उनके आश्रितों ने इन कोर्सों में भाग लिया, जिससे उन्हें स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए।
प्रेरणा स्थलों का निर्माण एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम
मुनस्यारी विकासखंड के बिर्थी गांव में, भारत के पहले महावीर चक्र विजेता शहीद दिवान सिंह दानू की प्रतिमा, बिर्थी इंटर कॉलेज में स्थापित की गई, जो युवाओं के लिए प्रेरणा स्थल बन चुका है। शहीद जवानों के पार्थिव शरीर के आगमन पर संगठन पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ पुष्पचक्र अर्पित करता है। पूर्व सैनिकों के निधन पर संगठन उनके घर जाकर अंतिम यात्रा में शामिल होता है।
वीरांगनाओं की बेटियों का सम्मान
शहीद वीरांगनाओं की पुत्रियों की शादी में संगठन के सदस्य कन्यादान करते हैं, और भारत माता के जयकारों के साथ बेटी की विदाई करते हैं। यह संदेश देता है कि शहीद का परिवार कभी अकेला नहीं होता।
युवाओं को सेना भर्ती के लिए मार्गदर्शन
संगठन के सदस्य सेना, पुलिस, प्रादेशिक सेना में जाने के इच्छुक युवाओं को निःशुल्क अनुभव साझा करते हैं, प्रशिक्षण देते हैं। इसके फलस्वरूप सैकड़ों युवा वर्तमान में देश सेवा में कार्यरत हैं। वर्ष 2024 में देहरादून में आयोजित खादी सेमिनार में संगठन के 12 पूर्व सैनिकों ने भाग लिया, जहां भारत सरकार के मंत्री ने संगठन की सराहना की।
सहायता कोष और सेवा भाव
संगठन द्वारा गठित पूर्व सैनिक सहायता कोष के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को खाद्य सामग्री, वस्त्र, पुस्तकें एवं चिकित्सा हेतु सहायता दी जाती है। यह कोष सभी पूर्व सैनिकों के ऐच्छिक योगदान से संचालित होता है।पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ द्वारा प्रादेशिक सेना भर्ती हेतु बाहरी प्रदेशों से आए बच्चों के लिए निःशुल्क भोजन की व्यवस्था की गई है।
धार्मिक यात्राओं का आयोजन
22 से 31 अक्टूबर 2024 तक संगठन ने स्थानीय सेना से सहयोग कर 18 पूर्व सैनिकों व आश्रितों को आदि कैलाश, ओम पर्वत और बड़े कैलाश की यात्रा कराई। इसके अतिरिक्त 13 से 25 फरवरी 2025 के बीच 109 पूर्व सैनिकों को महाकुंभ स्नान कराया गया, जिसमें विशेष सुविधा, गाड़ी पार्किंग, गेस्ट रूम एवं भोजन की व्यवस्था करवाई गई।
भविष्य की दिशा : सैन्य गरिमा और प्रेरणा का संरक्षण
पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ निरंतर प्रयासरत है कि जनपद की सैन्य परंपरा, गौरवशाली इतिहास और शौर्यगाथा को संरक्षित रखते हुए, इसे युवा पीढ़ी तक प्रेरणा स्रोत के रूप में हस्तांतरित किया जा सके। सैनिकों के सम्मान की यह श्रृंखला भविष्य में भी जारी रहेगी।
📌 संगठन की विशेष पहचान
सैन्य अनुशासन के साथ सामाजिक नेतृत्व: संगठन अपने सदस्यों में अनुशासन, समयबद्धता और सेवा भाव को बनाए रखते हुए समाज में नेतृत्व की मिसाल प्रस्तुत करता है।
आपदा राहत में सक्रिय भागीदारी: उत्तराखंड जैसे आपदाप्रवण राज्य में संगठन के सदस्य स्थानीय आपदा राहत और बचाव कार्यों में प्रशासन के साथ मिलकर सक्रिय योगदान देते हैं।
स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन: संगठन समय-समय पर नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर, ब्लड डोनेशन कैंप एवं ईसीएचएस योजना से संबंधित जागरूकता अभियान चलाता है।
ग्राम स्तर तक पहुंच: यह संगठन जिला स्तर पर ही नहीं, बल्कि ब्लॉक और गांव स्तर तक भी पूर्व सैनिकों को संगठित कर उनके मुद्दों को सामने लाने का कार्य करता है।
रक्षा सेवाओं में प्रेरणा केंद्र: संगठन द्वारा चलाए जा रहे प्रेरक सत्र एवं मार्गदर्शन कार्यक्रमों से स्थानीय युवाओं में सेना में भर्ती के प्रति रुचि और प्रेरणा बढ़ती है।
सम्मान एवं स्मृति: संगठन हर वर्ष शहीद दिवस या स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसरों पर स्थानीय शहीदों व वीर सैनिकों को सम्मानित कर उनकी स्मृति को सजीव बनाए रखता है।
राज्य सरकार से समन्वय: पूर्व सैनिकों की पेंशन, स्वास्थ्य, रोजगार एवं भूमि विवाद जैसे मामलों में सरकार के साथ नियमित संधर्ष और समन्वय करता है।
पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ की ओर से हम समस्त वीर सैनिकों को सादर नमन एवं श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दी या वीरता से मातृभूमि की रक्षा की। यह संगठन सदैव उनके त्याग, शौर्य और समर्पण को सम्मानपूर्वक स्मरण करता रहेगा तथा उनके परिवारों के अधिकारों एवं सम्मान की रक्षा के लिए पूर्ण निष्ठा से समर्पित रहेगा। ऐसे वीरों का बलिदान हमारी प्रेरणा है और उनका गौरवशाली इतिहास हमारी धरोहर। जय हिंद!
