नायक रामी चंद
सेनिक रामी चंद भारतीय थल सेना के एक वीर और समर्पित सैनिक थे, जिन्होंने देश की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी सेवा संख्या 4136534 थी और वे 2 कुमाऊँ रेजिमेंट के अंतर्गत कार्यरत थे। यह रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे पुरानी और गौरवशाली रेजिमेंटों में से एक मानी जाती है, जिसने देश की रक्षा में अनेक युद्धों और संघर्षों में अपना परचम लहराया है।
- रामी चंद जी ने सन् 1947 में भारत की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए अद्वितीय साहस का परिचय देते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। यह वह समय था जब देश स्वतंत्र हुआ ही था और विभाजन के कारण उत्पन्न हुई अराजकता एवं सीमा पर पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों के आक्रमणों का सामना करना पड़ रहा था। कश्मीर घाटी और उत्तर के सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय सेना की तैनाती महत्वपूर्ण हो गई थी। ऐसे ही एक सैन्य अभियान के दौरान रामी चंद जी को उनकी यूनिट के साथ अग्रिम मोर्चे पर भेजा गया था।
उन्होंने न केवल अपने सैन्य कर्तव्यों को निष्ठा से निभाया, बल्कि अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी वीरता और धैर्य का परिचय देते हुए अपने साथियों का मनोबल ऊँचा बनाए रखा। इसी दौरान वे देश के लिए वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी शहादत ने न केवल उनकी यूनिट बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया।
उनके बलिदान को सम्मानित करते हुए उनका नाम “Honour Point” जैसे राष्ट्रीय शौर्य पोर्टल पर दर्ज किया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ उनके साहस और समर्पण को याद रख सकें। उनकी वीरता भारतीय इतिहास में अमर है और वह उन हजारों वीरों की श्रेणी में आते हैं, जिनकी वजह से हम आज स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं।
वीर सैनिक श्री रामी चंद जी को हम राष्ट्र की ओर से कोटि-कोटि नमन करते हैं, जिन्होंने 2 कुमाऊँ रेजिमेंट में सेवा करते हुए 1947 में भारत की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उनका बलिदान भारतीय सेना के अद्वितीय साहस और समर्पण का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा। हम उन्हें पूर्ण सम्मान, श्रद्धा और गर्व के साथ श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और कहते हैं—”आपकी शहादत अमर है, देश आपके बलिदान को सदैव स्मरण करता रहेगा। वंदे मातरम्!
