नायक श्याम सिंह

नायक श्याम सिंह, पुत्र ग्राम टोली, पट्टी रावल, जनपद अल्मोड़ा (वर्तमान में जनपद पिथौरागढ़), उत्तर प्रदेश (अब उत्तराखंड) के निवासी थे। उनका जन्म २८ फ़रवरी १९१६ को एक साधारण लेकिन राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत परिवार में हुआ था। देश सेवा की भावना से प्रेरित होकर उन्होंने २८ फ़रवरी १९३६ को भारतीय सेना में भर्ती ली और अपनी वीरता व समर्पण के बल पर सैन्य जीवन की कठिन यात्राएँ तय कीं।

नायक श्याम सिंह ने बंगाल इंजीनियर्स रेजिमेंट के अंतर्गत कार्य करते हुए द्वितीय विश्व युद्ध (१९४१–१९४३) के दौरान उत्तर अफ्रीकी अभियान में हिस्सा लिया। यह अभियान भारतीय सेना के गौरवशाली अध्यायों में से एक था, जो ४वीं भारतीय इन्फैंट्री डिवीजन के अंतर्गत, महान सेनापति लेफ्टिनेंट जनरल बर्नार्ड मोंटगोमरी के नेतृत्व में संचालित हुआ था। इस युद्ध में अद्वितीय साहस, अनुशासन और सैन्य रणनीति के लिए उन्हें ब्रिटिश भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड लिनलिथगो द्वारा वीरता और उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए “जंगी इनाम” से सम्मानित किया गया।

नायक श्याम सिंह ने सैन्य जीवन में निरंतर उत्कृष्टता प्रदर्शित की और सेवा के अंतिम वर्षों में उन्हें जेसी-५३२१७ सूबेदार मेजर तथा मानद लेफ्टिनेंट के रूप में पदोन्नत किया गया। उन्होंने अपना सेवा जीवन २५ अक्टूबर १९६७ को पूर्ण किया और इसके बाद वे अपने पैतृक गाँव टोली, पोस्ट ऑफिस गुर्ना, जनपद पिथौरागढ़ में निवास करने लगे। उनका देहावसान ५ जुलाई १९७१ को हुआ।

नायक श्याम सिंह न केवल उत्तराखंड, बल्कि सम्पूर्ण भारतवर्ष के लिए गौरव का विषय हैं। उनके सैन्य योगदान, युद्धकालीन सेवा और अनुकरणीय जीवनशैली को आने वाली पीढ़ियाँ सदैव स्मरण करेंगी। उनका जीवन सच्चे सैनिक और समर्पित राष्ट्रभक्त का प्रतीक है, जो मातृभूमि की रक्षा हेतु हर चुनौती को स्वीकार करने को तत्पर रहते हैं।

वीरता, कर्तव्य और राष्ट्रसेवा के आदर्श प्रतीक, मानद लेफ्टिनेंट एवं सूबेदार मेजर श्री श्याम सिंह जी को शत्-शत् नमन। द्वितीय विश्व युद्ध में उत्तर अफ्रीकी अभियान के दौरान अद्वितीय साहस और उत्कृष्ट सैन्य सेवा के लिए “जंगी इनाम” से सम्मानित यह वीर योद्धा भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा के प्रेरणास्रोत हैं। उनका जीवन बलिदान, अनुशासन और देशभक्ति की अमिट मिसाल है, जिसे भारतवर्ष सदा गर्व से स्मरण करता रहेगा।