असिस्टेंट कमांडेन्ट चारु चंद्र पाठक , पुलिस पदक

वीर अमर शहीद सहायक सेना नायक चारु चंद्र पाठक उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जनपद से थे, जिन्होंने भारत माता की रक्षा हेतु अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था, लेकिन उनके भीतर देशभक्ति की भावना असाधारण थी। उन्होंने प्रारम्भ से ही सेना में जाने का सपना देखा और अपने दृढ़ संकल्प के बल पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) में सहायक कमांडेंट के पद पर नियुक्त हुए।

चारु चंद्र पाठक ने देश की आंतरिक सुरक्षा के साथ-साथ सीमाओं की रक्षा में भी अहम भूमिका निभाई। वे अनेक कठिन ऑपरेशनों का हिस्सा रहे और हर परिस्थिति में अपने साहस, समर्पण और रणनीतिक कौशल का परिचय दिया। उनकी वीरता का सबसे बड़ा उदाहरण उस समय देखने को मिला जब उन्होंने आतंकवादियों के विरुद्ध चलाए जा रहे एक ऑपरेशन में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने बिना अपनी जान की परवाह किए, अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए कई नागरिकों और अपने साथियों की जान बचाई।

उनकी इस अद्वितीय वीरता और कर्तव्यनिष्ठा को सम्मानित करते हुए भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा उन्हें पुलिस वीरता पदक (Police Medal for Gallantry) से मरणोपरांत सम्मानित किया गया। इसके साथ ही, भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम द्वारा उन्हें २८ नवम्बर २००५ को एक गरिमामयी समारोह में वीरता मेडल प्रदान किया गया।

उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है – एक ऐसा सपूत जिसने देश की सेवा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी, परंतु अपने कर्तव्य से कभी पीछे नहीं हटे। चारु चंद्र पाठक आज भी अपने गाँव, जनपद, और समूचे उत्तराखंड के लिए गौरव और प्रेरणा का प्रतीक हैं। उनका बलिदान हमेशा भारतवर्ष की माटी में अमर रहेगा।

स्मृति गैलरी

चारु-चंद्र पाठक जी को शत-शत नमन। उनका जीवन साहस, सेवा और समर्पण का प्रतीक रहा है। देश के प्रति उनके वीरतापूर्ण बलिदान को राष्ट्र सदैव स्वर्णिम स्मृतियों में संजोकर रखेगा। उनका त्याग और कर्तव्यनिष्ठा हमें सदा प्रेरित करती रहेगी। वे हमारे हृदयों और चिंतन में सदैव जीवित रहेंगे। ईश्वर से प्रार्थना है कि उन्हें अपनी पावन शरण में स्थान दें और हम सबको उनके आदर्शों पर चलने की शक्ति प्रदान करें।