सिपाही शिवलाल वर्मा
शहीद शिव लाल वर्मा पुत्र स्वर्गीय पूना लाल वर्मा ग्राम मल्ली बसै, पोस्ट ऑफिस दशाईथल, तहसील गंगोलीहाट, जिला पिथौरागढ़, उत्तराखंड के निवासी थे। उनका जन्म ०१ दिसंबर १९४२ को हुआ था। उनकी माता, मोतीमा देवी, एक गृहिणी थीं, जिन्होंने गरीबी की कठिन परिस्थितियों में अपने पाँच पुत्रों और तीन पुत्रियों का कठिन परिश्रम और समर्पण के साथ पालन-पोषण किया। शिव लाल वर्मा परिवार में सबसे छोटे थे।
उनका बाल्यकाल दशाईथल में बीता तथा उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा गंगोलीहाट से पूरी की। बचपन से ही वे अध्ययन के साथ-साथ खेलकूद में भी रुचि रखते थे। उनके बड़े भाई भगवती लाल वर्मा पहले ही सेना में भर्ती हो चुके थे। उनसे प्रेरित होकर शिव लाल वर्मा ने भी भारतीय सेना में जाने का दृढ़ निश्चय किया। अपनी अथक लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर दिनांक २६ दिसंबर १९६२ को उन्होंने अल्मोड़ा से कुमाऊं रेजिमेंट में भर्ती होकर १५ कुमाऊं में प्रशिक्षण प्राप्त किया।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उनकी पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में हुई। वर्ष १९६५ के भारत-पाक युद्ध के दौरान उन्होंने बहादुरी का परिचय देते हुए दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया। मात्र २२ वर्ष की अल्पायु में, दिनांक २३ सितम्बर १९६५ को वे वीरता पूर्वक लड़ते हुए शहीद हो गए। उनकी वीरता की गाथा उनके साथियों और क्षेत्र के लोगों के बीच आज भी आदर और सम्मान के साथ गाई जाती है।
गंगोलीहाट क्षेत्र के कई युवा शहीद शिव लाल वर्मा से प्रेरित होकर भारतीय सेना में भर्ती हुए हैं और देश की रक्षा के लिए तत्पर हैं। आज भी क्षेत्र के लोग शहीद शिव लाल वर्मा को श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करते हैं तथा उनकी आत्मा की शांति के लिए विशेष श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
"वीरता पुरस्कार"
“मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले, अदम्य साहस और शौर्य के प्रतीक, वीर शहीद सिपाही शिवलाल वर्मा जी को शत्-शत् नमन। आपका बलिदान राष्ट्र की गौरवगाथा का अमर अध्याय है, जो सदैव प्रेरणा देता रहेगा।”
