शौर्य चक्र
सिपाही हीरा बल्लभ नगरकोटि, शौर्य चक्र
१४७०११०६ शहीद सिपाही हीरा बल्लभ नगरकोटि भारतीय थल सेना की प्रतिष्ठित २० कुमाऊँ रेजिमेंट (२० के.आर.) के एक अद्वितीय और साहसी सैनिक थे। वे उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जनपद स्थित मखौलीगांव, दौला के निवासी थे। उनका जीवन बचपन से ही देशभक्ति और सेवा भावना से प्रेरित था। उन्होंने भारतीय सेना में भर्ती होकर राष्ट्र की रक्षा का संकल्प लिया और अपने कर्तव्यों का पालन अत्यंत वीरता और निष्ठा के साथ किया।
अपनी सेवा के दौरान उन्होंने कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया और हर चुनौती को बहादुरी से पार किया। १२ अक्टूबर १९८४ को एक विशेष सैन्य अभियान के दौरान उन्होंने अपनी वीरता और अदम्य साहस का परिचय देते हुए देश की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके इस वीरता पूर्ण कृत्य के लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र, जो शांति काल का तीसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है, से सम्मानित किया।
शहीद हीरा बल्लभ नगरकोटि न केवल पिथौरागढ़ क्षेत्र के बल्कि सम्पूर्ण उत्तराखंड और राष्ट्र के लिए एक अमर प्रेरणा हैं। उनकी शहादत आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाती है कि मातृभूमि की रक्षा सर्वोपरि है। उनकी बहादुरी, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान को देश सदैव गर्व और सम्मान के साथ स्मरण करता रहेगा। ऐसे वीर सपूतों का जीवन राष्ट्र की रक्षा के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।
स्मृति संग्रह
📰समाचार पत्र अभिलेख
गृह नाम पट्ट
शहीद सिपाही हीरा बल्लभ नगरकोटि को शत-शत नमन, जिन्होंने अपने अदम्य साहस, वीरता और राष्ट्रभक्ति से मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका जीवन भारत के उन वीर सपूतों का प्रतीक है जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के देश के सम्मान के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। वे न केवल उत्तराखंड की मिट्टी के गौरव हैं, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। उनका बलिदान हमें सदैव यह स्मरण कराता है कि देश की रक्षा में समर्पित हर सैनिक अमर होता है। राष्ट्र उनकी वीरगाथा को सदैव सम्मान और गर्व से याद करता रहेगा।
