लांस नायक किशन सिंह भंडारी, सेना मेडल

लांस नायक किशन सिंह का जन्म १६ मार्च १९६७ को उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जनपद के अजूरानी गांव में श्री मान सिंह भण्डारी के घर हुआ था। उन्हें बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था, विशेष रूप से १८ गढ़वाल राइफल रेजीमेंट से जुड़ने की प्रबल इच्छा थी। अपने इसी जुनून के चलते उन्होंने २४ जून १९८६ को भारतीय सेना में भर्ती होकर प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिसके पश्चात् उनकी नियुक्ति १८ गढ़वाल राइफल में की गई।

मई १९९९ में जब जम्मू-कश्मीर के कारगिल क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना द्वारा घुसपैठ की गई, तब भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन विजय’ के अंतर्गत जवाबी कार्रवाई प्रारंभ की। इस ऑपरेशन में १८ गढ़वाल राइफल को कारगिल के द्रास सेक्टर में कार्यवाही की ज़िम्मेदारी सौंपी गई। कारगिल की बर्फीली, ऊँची और दुर्गम पहाड़ियों पर लड़ाई अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी, परंतु इस बटालियन के वीर जवानों ने अद्भुत साहस दिखाते हुए दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर किया और फिर से भारतीय तिरंगा उन चोटियों पर फहराया।

इस वीरतापूर्ण युद्ध के दौरान, २१ जून १९९९ को लांस नायक किशन सिंह समेत १८ जवान शहीद हो गए। मात्र ३२ वर्ष की आयु में देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले लांस नायक किशन सिंह को उनके शौर्य, कर्तव्यनिष्ठा, एवं अदम्य साहस के लिए मरणोपरांत “सेना मैडल” से सम्मानित किया गया।

प्रेस विज्ञप्ति

''कारगिल शहीद लांस नायक किशन सिंह भंडारी (सेना मेडल) की पुण्यतिथि पर पूर्व सैनिक संगठन द्वारा भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित''

कारगिल युद्ध के 26 वर्ष पूर्ण होने के साथ-साथ जनपद पिथौरागढ़ के कारगिल शहीद किशन सिंह सेना मेडल की पुण्यतिथि पर विपरीत मौसम के साथ श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शहीद के गौरवान्वित इतिहास को याद किया गया।
जून 1999 को आज ही के दिन कारगिल युद्ध के दौरान द्रास सेक्टर पर दुश्मनों के हौसलों को परास्त करते हुए 18 गढ़वाल राइफल द्वारा दुर्गम चोटियों पर फतह हासिल की थी और इसी युद्ध के दौरान अपनी असीम वीरता और पराक्रम को दिखाते हुए लांस नायक किशन सिंह भंडारी द्वारा देश के लिए अपनी शहादत दी थी। उनकी वीरता को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। आज उनकी 27वीं पुण्यतिथि पर शहीद के नाम से निर्मित शहीद द्वार जजुराली पर जाकर पूर्व सैनिक संगठन द्वारा शहीद के परिवार जनों ओर क्षेत्र वासियों के साथ श्रद्धांजली कार्यक्रम आयोजित किया गया।
विपरीत मौसम के बावजूद आम जन मानस के साथ पूर्व सैनिकों द्वारा शहीद को याद कर, ऐसे बलिदान को इस सैन्य जनपद की परंपरा कहा गया।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम पर भारत मां की जय के जयकारों के साथ कार्यक्रम को देशभक्ति से परिपूर्ण कार्यक्रम बना दिया गया। अमर वीर के जयकारों से जहां गुरुंग घाटी गूंज उठी वही शहीद की वीरांगना श्रीमती तनुजा भंडारी के नम आंखों से एक वीर नारी के गौरव को देखा जा सकता था, जो अपने सुहाग को देश के लिए बलिदान करने के बाद आज हमारे नव युवाओ,आम जन मानस के लिए एक प्रेरणा स्वरूप श्रद्धांजलि अर्पित कर रही थी, और स्वयं से पहले देश के अमृत वाक्य को यथार्थ कर रही थी।

वीरांगना बहन श्रीमती तनुजा भंडारी ने बताया कि शहीद के नाम पर एक शहीद द्वार की मांग को दो दशकों से लगातार उनके द्वारा उठाया जा रहा था और पिछले वर्ष पूर्व सैनिक संगठन के माध्यम से इसे पूर्ण होता देखना एक विशेष अनुभूति थी और आज यह दिन ओर यह विशेष स्थान सभी के लिए प्रेरणा स्थल के तौर पर है यह उनके लिए सबसे बड़ा सुकून देने वाला एहसास है।

इस मौके पर पूर्व सैनिक संगठन द्वारा वीरांगना श्रीमती तनुजा भंडारी को शाल ओढाकर सम्मानित किया गया,

आज के कार्यक्रम पर पूर्व सैनिक संगठन के माध्यम से सचिव सु मेजर रमेश सिंह महर, दयाल सिंह, शेर सिंह, हरीश सिंह,भूपाल सिंह,राजेंद्र जोरा, हयात सिंह, श्याम विश्वकर्म, राजेंद्र सिंह बोहरा, नरेंद्र सिंह साहब आदि पूर्व सैनिकों सहित आम जनमानस मौजूद रहे । पूजन कार्यक्रम संगठन के धर्म गुरु नवीन गुर्रानी साहब द्वारा किया गया वही संचालन लक्ष्मण देवपा साहब द्वारा किया गया।

स्मृति संग्रह

हम परम वीर लांस नायक किशन सिंह को उनकी अद्वितीय वीरता, अदम्य साहस, और मातृभूमि के प्रति समर्पण के लिए शत-शत नमन करते हैं। कारगिल युद्ध में उन्होंने जिस अद्भुत साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया, वह प्रत्येक भारतीय के हृदय में सदा अमिट रहेगा।

उनका बलिदान राष्ट्र की अखंडता और गौरव की रक्षा हेतु था, जिसे हम कभी भुला नहीं सकते। उनके साहस और शौर्य ने आने वाली पीढ़ियों को देश सेवा और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा दी है। हम उनके बलिदान को कोटिशः प्रणाम करते हैं और उनके यशस्वी स्मरण को सदा नमन करते रहेंगे।

“वंदे मातरम्!”