ब्रिगेडियर डी.एस. अधिकारी, वीर चक्र
ब्रिगेडियर धन सिंह अधिकारी का जन्म ६ जून १९४७ को ग्राम टोली, डाकघर गुरना में हुआ था। इनके पिता श्री श्याम सिंह, जो कि सब मेजर थे, और माता श्रीमती जैन्ती देवी थीं। प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने अपने गांव टोली में १९५२ से १९५६ तक पाँचवीं कक्षा तक प्राप्त की। इसके बाद वे १९५८ से १९६४ तक किंग जॉर्ज स्कूल, बैंगलोर में पढ़े। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने १९६५ से १९६८ तक दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में अध्ययन किया। इसके बाद वे १९६८ से १९६९ तक चेन्नई के ऑफिसर्स ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षण प्राप्त करने गए।
भारतीय सेना में उन्हें १५ जून १९६९ को कमीशन मिला और वे 15 डोगरा रेजिमेंट से जुड़े। उन्होंने १९९१ से १९९३ तक 11 डोगरा के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में सेवा दी। इसके बाद वे १९९८ से १९९९ तक 40 इन्फैंट्री ब्रिगेड के कमांडर रहे। वर्ष १९९९ से २००१ तक उन्होंने सब एरिया कमांडर के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। इसके बाद वे २००१ से २००३ तक डिप्टी डायरेक्टर जनरल, नेशनल कैडेट कॉरप्स (NCC) के पद पर कार्यरत रहे। उनकी सेवा अवधि ३० जून २००३ को सुपरएनेशन के साथ समाप्त हुई।
ब्रिगेडियर अधिकारी ने अपने स्कूल और कॉलेज के समय में कई खेलों में भाग लिया और उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। किंग जॉर्ज स्कूल, बैंगलोर के लिए उन्होंने हॉकी, टेनिस और फुटबॉल खेला। हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के लिए हॉकी, बास्केटबॉल और टेनिस में प्रतिनिधित्व किया। वर्ष १९६५ में उन्होंने दिल्ली राज्य क्रॉस कंट्री दौड़ में विजेता का खिताब भी प्राप्त किया।
१३ दिसंबर १९७१ को, १५ डोगरा के कप्तान धन सिंह अधिकारी को पश्चिमी क्षेत्र में शत्रु की कुछ रक्षा पंक्तियों की सटीक स्थिति का पता लगाने का कार्य सौंपा गया था। अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना, उन्होंने दुश्मन की रक्षा के बहुत करीब जाकर सूचनाएँ एकत्रित कीं, जो शत्रु के खिलाफ हमले की योजना बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुईं।
हमले के दौरान, उनकी कंपनी को दो मीडियम मशीन गनों द्वारा एक ओर से गोलीबारी कर रोक दिया गया था। कप्तान अधिकारी ने तुरंत एक मशीन गन की ओर दौड़ लगाई और उसे बंद कर दिया। इस साहसिक कार्य के कारण शत्रु को उस पोस्ट को छोड़ना पड़ा। इन सभी कार्यों में कप्तान अधिकारी ने उच्चस्तरीय वीरता, दृढ़ संकल्प और कर्तव्य निष्ठा का परिचय दिया।
देश की सुरक्षा एवं अखंडता की रक्षा हेतु कैप्टन धन सिंह अधिकारी द्वारा प्रदर्शित असाधारण साहस, पराक्रम एवं समर्पण को हम गहन श्रद्धा एवं सम्मान के साथ नमन करते हैं। उनके उत्कृष्ट वीरत्व और त्याग ने न केवल युद्धभूमि में शत्रु को परास्त किया, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र के हृदय में देशभक्ति एवं उत्साह की नवीन चेतना का संचार किया। उनका यह महान योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का अपूरणीय स्रोत बना रहेगा।
