कारगिल शहीद, पी.टी.आर. कुण्डल सिंह बेलाल

पी०टी०आर० कुण्डल सिंह बेलाल का जन्म २२ जुलाई १९७८ को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के बेलाल गांव में हुआ। वे श्री राम सिंह बेलाल एवं श्रीमती कुना देवी के पुत्र थे। बचपन से ही देशभक्ति की भावना उनमें गहरी थी और वे भारतीय सेना में सेवा करने का सपना लेकर बड़े हुए।

उन्होंने भारतीय सेना की पैरा कमांडो रेजिमेंट में भर्ती लेकर कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद वे १०वीं पैरा (स्पेशल फोर्सेज) में शामिल हुए, जो सेना की सबसे विशेष और कठिन ऑपरेशनल इकाइयों में से एक है। उनकी इस सेवा में उत्कृष्टता और साहस की गाथाएँ प्रख्यात हैं।

मई १९९९ में, जब पाकिस्तानी सैनिकों ने एलओसी के पार घुसपैठ कर विभिन्न ऊँचे चोटियों पर कब्जा किया, तब भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय आरंभ किया। इस ऑपरेशन के तहत पी०टी०आर० कुण्डल सिंह बेलाल की यूनिट १० पैरा (एसएफ) को बटालिक सेक्टर में तैनात किया गया।

१९ मई १९९९ को, उन्हें जंक लुंग्पा क्षेत्र में दुश्मन को खदेड़ने और क्षेत्र को सुरक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य सौंपा गया। इस क्षेत्र में दुश्मन की भारी गोलीबारी और कड़ी लड़ाई हुई। नायक कुण्डल सिंह ने साहस और आत्मबलिदान की मिसाल देते हुए अपने साथियों के साथ दुश्मन के सामने डटकर लड़ाई लड़ी।

इस भीषण युद्ध में वे गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका निधन हो गया। उनका यह बलिदान भारतीय सेना के लिए अपूरणीय क्षति थी, परंतु उनकी बहादुरी ने अन्य सैनिकों को प्रेरित कर मिशन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

देश के प्रति अपनी अदम्य निष्ठा और सर्वोच्च बलिदान के लिए हम हृदय से पी०टी०आर० कुण्डल सिंह को नमन करते हैं। उनके साहस, समर्पण और देशभक्ति की भावना ने हमें सिखाया कि असली वीरता क्या होती है। उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर हमारी मातृभूमि की रक्षा की और भारत माता की शान को बुलंद किया। उनकी वीरता और त्याग की गाथा सदैव हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।