शहीद नायक गोपाल सिंह पोखरिया, कीर्ति चक्र
शहीद नायक गोपाल सिंह पोखरिया भारतीय सेना की 3 कुमाऊँ राइफल्स के एक वीर सैनिक थे। उनका जन्म ३० दिसम्बर १९०१ को उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जनपद के वियोग गांव में श्री उदय सिंह पोखरिया के घर हुआ था। उन्होंने ०७ जनवरी १९२१ को सेना में भर्ती होकर रानीखेत से सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद उन्हें 3 कुमाऊँ रेजिमेंट में नियुक्त किया गया।
२९ अगस्त १९९७ को जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के निकट चक्र कटेहपुर क्षेत्र में एक सैन्य अभियान के दौरान उन्होंने अद्भुत साहस और नेतृत्व का परिचय दिया। इस ऑपरेशन का उद्देश्य आतंकवादियों का सफाया करना था, और इसकी जिम्मेदारी 3 कुमाऊँ राइफल्स को सौंपी गई थी। नायक गोपाल सिंह ने अपने दल का नेतृत्व करते हुए भीषण गोलाबारी के बीच कई आतंकवादियों को मार गिराया।
मुठभेड़ के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत बेस अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका और उसी दिन १५:३० बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
शहीद नायक गोपाल सिंह पोखरिया को उनकी वीरता, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान के लिए भारत सरकार द्वारा मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। उनके बलिदान को सम्मान देने हेतु उनके गांव में एक स्मारक का निर्माण भी किया गया है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा प्रदान करता है।
“स्मृति-कार्य”
शहीद नायक गोपाल सिंह पोखरिया को हम शत-शत नमन करते हैं, जिनकी वीरता, अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण ने उन्हें अमर शहीदों की श्रेणी में प्रतिष्ठित किया। उन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देकर यह सिद्ध कर दिया कि सच्चा सैनिक वही होता है जो कर्तव्य के पथ पर अडिग रहते हुए राष्ट्र के सम्मान की रक्षा में पीछे नहीं हटता। उनका बलिदान हम सभी के लिए प्रेरणा का स्तम्भ है, और उनके शौर्य की गाथा सदैव राष्ट्र के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगी।
