ऑनरी. लेफ्टी. उत्तम सिंह, मिलिट्री क्रॉस*
मिलिट्री क्रॉस ३आसाम राइफल्स
उत्तम सिंह भारतीय मूल के एक वीर सैनिक थे, जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध (१९३९ से १९४५) के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना के लिए अद्वितीय साहस के साथ युद्ध लड़ा। वह गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट से जुड़े हुए थे और उनकी बहादुरी के किस्से आज भी लोगों की जुबान पर हैं। उत्तराखंड के एक छोटे से गाँव में जन्मे उत्तम सिंह का पालन-पोषण एक देशभक्त परिवार में हुआ था, जहाँ उन्हें शुरू से ही देशसेवा की प्रेरणा मिली। गाँव के वातावरण ने उनमें अनुशासन और देशभक्ति की भावना को और मजबूत किया।
उत्तम सिंह ने सेना में भर्ती होकर अपने सैन्य जीवन की शुरुआत की और बहुत कम समय में अपनी बहादुरी और कुशल नेतृत्व क्षमता के कारण अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनकी तैनाती बर्मा (अब म्यांमार) के युद्ध क्षेत्र में हुई थी, जहाँ उन्होंने जापानी सेना के विरुद्ध कई निर्णायक मोर्चों पर अद्वितीय शौर्य दिखाया। एक अवसर पर जब दुश्मन की संख्या बहुत अधिक थी, तब भी उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर मोर्चा संभाला और दुश्मन के गढ़ में घुसकर उन्हें भारी नुकसान पहुँचाया। कई बार उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना अपने घायल साथियों को युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकाला।
उनकी इस असाधारण वीरता के लिए उन्हें ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा “मिलिटरी क्रॉस” जैसे उच्च सैन्य सम्मान से नवाज़ा गया। युद्ध के बाद भी उन्हें विभिन्न सार्वजनिक मंचों पर सम्मानित किया गया और उनकी कहानियाँ आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने लगीं। युद्ध समाप्त होने के बाद उत्तम सिंह ने सेना से सेवानिवृत्ति ली और अपने गाँव लौट आए। वहाँ उन्होंने युवाओं को अनुशासन, साहस और देशभक्ति का मार्ग दिखाया। उन्होंने समाज सेवा में सक्रिय योगदान दिया और अपने अनुभवों से लोगों को शिक्षित किया।
उत्तम सिंह की गिनती उन महान भारतीय योद्धाओं में होती है जिन्होंने न केवल युद्ध भूमि पर बल्कि सामान्य जीवन में भी अपने आदर्शों से समाज को दिशा दी। उत्तराखंड और विशेषकर गढ़वाल क्षेत्र में आज भी उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। उनके नाम पर कई स्कूल, मार्ग और स्मारक बनाए गए हैं, जो उनके अदम्य साहस और सेवा भावना की याद दिलाते हैं। उनके जीवन से यह सिद्ध होता है कि सच्चा नायक वही है जो युद्ध के मैदान से लौटकर भी समाज निर्माण में अपनी भूमिका निभाए।
वीर सपूत उत्तम सिंह को शत्-शत् नमन, जिन्होंने अपने अद्वितीय साहस, अटूट निष्ठा और सर्वोच्च बलिदान से राष्ट्रप्रेम की अनुपम मिसाल प्रस्तुत की। उन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण भारत माता की सेवा और सुरक्षा हेतु समर्पित किया। उनका त्याग, शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए न केवल प्रेरणास्त्रोत हैं, अपितु राष्ट्रसेवा के आदर्श भी हैं। देश उनके इस महान योगदान के लिए सदा ऋणी रहेगा।
